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वायु तत्व का मानव शरीर पर प्रभाव व महत्व

पंचतत्वों का मानव शरीर पर प्रभाव व महत्व 1. आकाश तत्व का मानव शरीर पर प्रभाव व महत्व 2. वायु तत्व का मानव शरीर पर प्रभाव व महत्व-   Effect and importance of air element on human body- पंच महाभूतों में आकाश तत्व के बाद वायु का स्थान है आकाश तत्व की प्राप्ति होते ही वायु तत्व स्वयं उत्पन्न हो जाता है। यह अन्य तत्वों की उत्पत्ति करने वाला भी है। वायु तत्व के बाद अग्नि, जल और पृथ्वी तत्व उत्पन्न होते हैं और विपरीत क्रम से यह तत्व वापस वायु में ही मिलकर लुप्त हो जाते हैं। वैसे तो मनुष्य के जीवन में पांचों तत्व महत्वपूर्ण हैं परन्तु वायु तत्व अपने आप में महत्वपूर्ण तत्व है क्योंकि अन्न, जल, धूप के बिना मनुष्य कुछ दिन जीवित रह सकता है पर वायु के अभाव में कुछ क्षण में ही दम घुटने लगता है। अतः यह कहा जा सकता है कि वायु ही ज़ीवन है। वायु तत्व हमें जीवन, शक्ति एवं स्फूर्ति प्रदान करता है। इसलिए वायु का पूर्ण लाभ उठाने के लिए उसके शुद्ध रूप को ग्रहण करना जरूर हो जाता है परन्तु आजकल के दूषित वातावरण में यह बहुत ही कठिन है। आये दिन अनेकों प्रकार के रोग और विशेष कर कैंसर आदि रोगो से लोग तीव्र गति से

पंचतत्वों का मानव शरीर पर प्रभाव व महत्व

पंचतत्वों का मानव शरीर पर प्रभाव व महत्व Effect and importance of Panchatatva on human body छिती जल पावक गगन समीरा, पंचतत्व रचित अधम सरीरा।। अर्थात पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से हमारा (भौतिक) शरीर बना है। इनमें केवल चार ही तत्व पृथ्वी, जल अग्नि और वायु हमारे भोजन की कोटि में आते हैं। रस, रक्त, मांस, भेद, अस्थि, मज्जा, एवं शुक्र इन सात धातुओं से मिलकर बने शरीर को हम देह कहते हैं। या स्थूल शरीर कहते हैं। आकाश, वायु, अग्नि जल और पृथ्वी ये सूक्ष्म भूत हैं। ये सूक्ष्म महाभूत मिलकर ही हमारे शरीर का निर्माण करते हैं ये पाँच तत्व जब प्रकृति में अलग रहते हैं तो सूक्ष्म होने के नाते अति शक्तिशाली होते हैं परन्तु जब वह स्थूल हो जाते हैं तो अपेक्षाकृत कम शक्तिशाली होते हैं। प्रकृति एवं हम में समान तत्व होने पर भी प्राकृतिक हमसे कई ज्यादा शक्तिशाली होती है। अतः हमें प्राकृति एवं उसमें पाए जाने वाले तत्वों में सामंजस्य स्थापित करना आना चाहिए तभी हम अपने अन्दर अधिक शक्ति का विकास कर पायेंगे।   आकाश तत्व का मानव शरीर पर प्रभाव व महत्व:- Effect and importance of sky element on human body- यह

पंच तत्वों का सामान्य परिचय

 पंच तत्व या पंच महाभूत-  इस सृष्टि का निर्माण पंच तत्वों से हुआ। इन पंच तत्वों को पंच महाभूत भी कहा जाता है। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश ये पांच तत्व मिलकर सम्पूर्ण सृष्टि की रचना करते हैं। साथ ही साथ मानव शरीर की रचना भी इन पंच तत्वो के द्वारा ही होती है। शरीर में ये पांच तत्व एक निश्चित योग (मात्रा) से उपस्थित होते हैं जिसे समयोग कहा जाता है। शरीर में पंच तत्वों का समयोग स्वास्थ्य है जबकि इन तत्वों का योग विषम होने पर शरीर में भिन्न प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक रोग उत्पन्न होते हैं। प्राकृतिक चिकित्सा इन पंच तत्वों को ही शरीर का आधार मानते हुए इसके महत्व को विशेष रुप से स्थान देती है। पंच तत्वों में पृथ्वी तत्व सबसे स्थूल तत्व है एवं आकाश तत्व सबसे सूक्ष्म तत्व है। शरीर में जो कुछ भी हमें स्थूल और भारी दिखाई दे रहा है जैसे- त्वचा, मांस, अस्थि आदि प्रकृति के पृथ्वी तत्व से बने हैं। शरीर के अन्दर दौंड़ते रक्त के तरल बनाए रखने के लिए प्रकृति ने जल तत्व की व्यवस्था की है। भोजन को पचाने के लिए विभिन्‍न प्रकार की अग्नियों की व्यवस्था शरीर में की गयी है। वायु द्वारा पोषण और गति के लिए

प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांत

  प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांंत Principles of Naturopathy प्राकृतिक चिकित्सा के मूलभूत सिद्धान्त इस प्रकार हैं - प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में दवाइयों का प्रयोग नहीं किया जाता है। - प्राकृतिक चिकित्सा में रोग एक, कारण एक तथा चिकित्सा भी एक ही होती है।  - रोगो का मूल कारण कीटाणु नही होते है। - तीव्र रोग शत्रु नही मित्र होते है। - प्रकृति स्वयं चिकित्सक है। - चिकित्सा रोग की नहीं शरीर की होती है। - रोग निदान की विशेष आवश्यकता नही होती है। - जीर्ण रोगो के आरोग्य में कुछ समय अधिक लगता है। - शरीर, मन, आत्मा का इलाज है प्राकृतिक चिकित्सा  - प्राकृतिक चिकित्सा में उभार की सम्भावना होती है। 1. प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में दवाइयों का प्रयोग नहीं किया जाता है- प्राकृतिक चिकित्सा में केवल 5 तत्वो मिट्टी, पानी, अग्नि, हवा, आकाश एवं छठा तत्व परम पिता जगत नियन्ता जगत का सृजनकर्ता ईशतत्व है, इस चिकित्सा में आहार के रूप में फल, साग सब्जी अनाजों का प्रयोग होता है इनमें भी भरपूर पांच तत्व है,संसार का कोई प्राणी या पौधा जो सजीव है बढ रहा है उन सब मे यही पांच तत्व विघमान है। इन पांच तत्वों के बिन